बुधवार, 16 जुलाई 2008

ट्रेन लुटेरे

ट्रेन लुटेरे वोह भी बिना हथियार ! स्टेशन पर गाड़ी रुकते ही धडाधड एक दो नहीं चार पाँच छ: डिब्बे में घुस कर लोगों की जेब से पैसे निकलवाना शुरू कर देते हैं। आनाकानी करने पर गलियों की बौछार । सबसे अधिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है बिहार प्रदेश के यात्रियों को। बेचारे देश के बड़े शहरों में नौकरी करके एक - एक पैसा जोड़ कर घर काम काज के लिए ले कर जाते हैं। पेट भर के खाना नसीब नहीं होता मेहनत की कमाईको ये लुटेरे जबरदस्ती जेब से खींच लेते हैं। और यह लुटेरे एक दो नहीं बल्कि लगभग हर station पर मिल जाते हैं। हमारी जी आर पी भी इनका कुछ नहीं bigaad पाती या यों कहें की इन्हें देख कर भी andekha कर देते हैं तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह ट्रेन लुटेरे कोई और नहीं बल्कि हर स्टेशन और हर डिब्बे में ताली chatkaate heezde हैं जिन के सामने हमारी पुलिस , कानून , हिम्मत सब बौने साबित हो रहे हैं। इनके लिए आज तक कोई कानून नहीं बना । न ही इन्हें किसी का कोई डर या खौफ है। पुलिस वाले इनसे हँसते हुए ठिठोलियाँ करते हैं और टी टीई किनारा कर के निकल जाते हैं। कोई शरीफ आदमी इनके मुंह नहीं लगना चाहता। इसी का फायदा उठाते हैं ये हीजड़े । न औरतों को बख्शते हैं और न आदमियों को । ईश्वर जाने कब इनको कानून के दायरे में लाया जाएगा। जाने कब पुलिस इनके खिलाफ एक्शन लेगी । जाने कब लोगों खास कर गरीबों और बिहार के mehanatkash मेहनत की कमाई की लुटाई बंद होगी.

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